मैं बहुत ज़्यादा परेशान हूँ। मैं जॉब करती थी लेकिन शादी के बाद से बहुत स्ट्रेस में रहने लगी हूँ। मुझे समझ नहीं आता है मैं क्या करूँ। मेरी लव मैरिज है, मेरे फ़ैमिली के अगेंस्ट जाके मैंने अपनी पसंद से शादी की है।
शादी के पहले से ही हस्बैंड की बहन कॉल करके मुझे शादी न करने के लिए कहती थी… कि फ़ैमिली की मर्ज़ी के बिना शादी मत करो क्योंकि वो नहीं चाहती थी कि उसका भाई मुझसे शादी करे।
हमने 8 साल के रिलेशन के बाद शादी की है। वो भी मेरी फ़ैमिली नहीं मानी तो मुझे मजबूरी में उनके अगेंस्ट जाके शादी करनी पड़ी। रीजन था इंटरकास्ट मैरिज। हस्बैंड की उस सिस्टर को मुझसे शुरू से ही प्रॉब्लम थी क्योंकि वो अपनी पसंद से अपने भाई का रिश्ता कराना चाहती थी जहाँ वो अपना हुकुम चलाती रहे, पर उस टाइम हस्बैंड पीछे नहीं हटे और मुझसे शादी करने के लिए ही तैयार थे।
फिर हमने मंदिर में शादी कर ली जहाँ ससुराल के लोग भी मौजूद थे। शादी के बाद से ही सास ससुर प्रेशर बनाने लगे कि ननद से बात किया करो उनका मान सम्मान करो पर ननद का भी तो कोई फ़र्ज़ बनता है कि नहीं भाभी के लिए।
फिर शादी के 8 महीने बाद मेरा रिसेप्शन रखा गया मेरे ससुराल में, तब मैं प्रेगनेंट थी। उस टाइम पे भी वो ननद घर आयी हुई थी। मेरी तबीयत ख़राब होने पे ड्रामा बताने लगी और जब मैं रो रही थी तो वो हँस रही थी। उसे इतनी भी शर्म नहीं आयी कि अगर मुझे कुछ हो गया तो बच्चे को भी नुक़सान हो सकता है।
मुझसे उसके इस बिहेवियर ने बहुत हर्ट किया और मैंने उससे कोई बात नहीं की। रिसेप्शन के अगले दिन वो ननद अपने भाई से बोल रही थी कि मुझे बस इतना चाहिए कि मैं जब आऊँ तो मुझे मान सम्मान मिले। आप ही बताओ ऐसे इंसान को कोई कैसे इज़्ज़त देगा जिसने उसके पेट में पल रहे बच्चे के बारे तक में न सोचा।
फिर जब मेरी डिलीवरी होने वाली थी तो मुझे अपनी जॉब छोड़के मजबूरी में ससुराल आना पड़ा क्योंकि हस्बैंड ऐसा चाहते थे। डिलीवरी से ठीक 1 हफ़्ते पहले वो ननद फिर से मायके आयी तो मैं अपने रूम में लेटी थी। मेरी कंडीशन ऐसी नहीं थी कि मैं बार बार उठ बैठ पाऊँ तो मैं बाहर निकल के नहीं गयी।
वो ननद मेरे रूम के बाहर बैठ के चाय नाश्ता करके बैठी थी अपनी माँ के साथ। वो एक बार भी खुद उठ के मुझसे मिलने नहीं आयी जबकि मेरी प्रेगनेंसी का लास्ट टाइम चल रहा था। उसके बाद जैसे ही मेरे हस्बैंड जॉब से आये सास तुरंत कंप्लेंट करने लगी हस्बैंड से कि तुम्हारी बीवी मेरी बेटी से बोली नहीं।
उसी टाइम हस्बैंड मुझसे आके पूछने लगे तुम दीदी से क्यों नहीं बोली जबकि मैं जब रूम से बाहर आयी थी तो वो वहाँ नहीं थी तो मैंने ये रीजन बता दिया हस्बैंड को। उस ननद के बच्चों से भी क्लियर करवाया कि मैं बाहर आयी थी ननद से मिलने पर वो तब वहाँ नहीं थी। फिर जाके हस्बैंड शांत हुए। उस प्रेगनेंसी के लास्ट टाइम में भी उस ननद ने मुझे रुलाया सिर्फ़ इसीलिए क्योंकि वो नहीं चाहती थी कि उसका भाई मुझसे शादी करे।
इन सब बातों की वजह से मेरा दिल इतना दुख चुका था कि मैंने उससे बात करनी बिल्कुल कम कर दी। अब इस बात पे भी इश्यू बनने लगे कि मैं उस ननद से बात नहीं करती हूँ। उसको भाव नहीं देती हूँ। तबसे लेकर आज तक जब जब वो मायके आती है, अपनी माँ के साथ मिलके अकेले में पता नहीं क्या क्या कहती है मेरे हस्बैंड से कि हस्बैंड आके मुझसे लड़ने लग जाते हैं, मुझपे गुस्सा करने लगते हैं कि सबके साथ बैठो बातें करो जो कि मुझसे नहीं होती थी।
सास भी यही चाहती हैं कि मैं उस ननद के क़दमों में बिछ जाया करूँ। बस इसीलिए कि वो थोड़े पैसे वाली है, उससे ज़्यादा तो मैं जॉब में कमाई कर लेती थी पर अब बेबी के छोटे होने की वजह से नहीं कर पा रही हूँ।
मैं परेशान हो गयी हूँ इन सब बातों से। हस्बैंड से जब अपनी प्रॉब्लम शेयर करती हूँ तो कहते हैं कि इसमें सिर्फ़ तुम्हारी ग़लती है घरवाले कुछ कहते हैं तो तुम चुपचाप सुन लिया करो। गुस्सा क्यों करने लगती हो। हस्बैंड भी यही चाहते हैं कि मैं उनके घरवालों के हाँ में हाँ मिलाया करूँ, जो कि मुझसे नहीं हो पाता है।
हमारी शादी में दूरियाँ बढ़ती जा रही हैं। ये बात मैंने अपने हस्बैंड से कई बार कही पर वो यही कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं है ये सिर्फ़ तुम्हें लगता है।मैं परेशान हो गयी हूँ अपने आप से… मैं क्या करूँ… अगर मैं हस्बैंड के घरवालों के अकॉर्डिंगली न चलूँ तो हस्बैंड भी मुझसे दूरी बनाने लगते हैं… उनका बिहेवियर तुरंत चेंज हो जाता है… फिर हस्बैंड को कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि फिर मैं चाहे मरूँ या जीऊँ।
मुझे समझ ही नहीं आ रहा है कि आख़िर मेरी ग़लती इसमें कहाँ है… क्या मैंने फ़ैमिली के अगेंस्ट लव मैरिज करके ग़लती की है या फिर यहाँ इस छोटे से गाँव में आके जहाँ एक नॉर्मल मार्केट भी घर से 20 किमी दूर है… कुछ भी काम हो आपको घर से 20 किमी दूर जाना पड़ेगा।
कहीं मैं डिप्रेशन में तो नहीं जा रही… या ये सब मेरी ओवरथिंकिंग की वजह से है… जो मैं इन सब बातों को नहीं भूल पा रही हूँ।
जज़्बात हेल्प सेंटर संस्थापक राजीव के सुझाव
आप एक नार्सिसिस्ट परिवार की बहू बन गई हैं। आपकी आपबीती की सारी घटनाएँ उसी पैटर्न की तरफ़ इशारा करती हैं। आपके पति ने एक कामकाजी लड़की को टारगेट किया। उसने आपकी अच्छाई को देखकर आपके साथ रिश्ते बढ़ाए। आपको आपके परिवार से काटा। फिर, उसने आपके बच्चे होने तक इंतज़ार किया। अब वो अपनी बहन, माँ और अन्य लोगों के साथ मिलकर आपको परेशान करेगा।
आपको कमज़ोर करने के लिए उसने पहले आपको परिवार से काटा। फिर उसके बाद जॉब छुड़वाकर गाँव में ले आया। अब आगे की आपकी ज़िंदगी कठिन है। अगर आपको अपनी ज़िंदगी बेहतर करनी है, तो उस गाँव से निकलें। फिर से जॉब पर लौटें। पति से कोई आशा या उम्मीद न रखें क्योंकि सारा इशारा नार्सिसिज्म के लक्षणों की तरफ़ है। ज़्यादा तकलीफ़ दें, तो अलगाव का रास्ता अपनाएँ।
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