किसी की आँख की शर्म इस क़दर मर जाती है कि उसे सही गलत में अंतर नहीं दिखता। समाज वाले कह देते हैं कि शादी के समय जाँच पड़ताल नहीं की थी क्या!
यह बात भी कुछ ऐसी ही है। मेरे गाँव की एक लड़की एक छोटे से शहर में शादी करके आ गई। आते ही उसका व्यवहार कुछ अजीब होने लगा। हाथ धोने के लिए भी चार मंज़िल ऊपर जाती, और दिन में 100 चक्कर लगाना तो तय था। इसी बीच बेटी हुई। बेटी को न देखकर पूरे दिन फ़ोन पर न जाने किसके साथ इतनी बात करना! बच्ची का ध्यान पूरा दिन लड़के की माँ रखती। उसी माँ पर लड़की तरह तरह के इल्ज़ाम लगाने लगी।
परेशान होकर लड़का, लड़की को उसके घर छोड़ आया। लड़की ने थाने में झूठी रिपोर्ट दर्ज करा दी। यहाँ तक कि उस झूठी रिपोर्ट में विदेश में रह रही उसकी बहन को भी घसीट दिया गया, जबकि बहन को शादी के बाद वापस घर गए एक साल हो चुका था। रिपोर्ट में झूठी मारपीट और दहेज का इल्ज़ाम लगाया गया।
पंचायत बुलाई गई। लड़की और लड़के को माँ बाप से अलग कर दिया गया। अब उसी घर में लड़की नीचे और माँ बाप ऊपर रहते थे। झूठे इल्ज़ाम दोबारा न लगे, इसलिए घर में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए गए।
लेकिन लड़की बाज़ नहीं आई। झूठा रोना, कमरे में जाकर ज़ोर से चिल्लाना, कपड़े फाड़ लेना… और भी न जाने क्या क्या करती रही।
तंग आकर लड़के ने उसे वापस उसके घर छोड़ दिया। पुलिस वाले के पास जाना हुआ, तो पुलिस वाले ने उसे सीधे वार्निंग दी कि इस लड़की से पीछा छुड़ा, नहीं तो ज़िंदगी बर्बाद है।
लड़के ने कहा कि मेरी एक बेटी है। पुलिस वाले ने वार्निंग दी कि बेटी के चक्कर में अपनी और माँ बाप की ज़िंदगी बर्बाद मत कर, मोह में पड़ेगा तो न जाने ज़िंदगी के साथ क्या हो जाए।
तब जाकर लड़के की आँखें खुलीं। लड़का अब घर से दूर रह रहा है। वह अभी तक लड़की को वापस नहीं लाया। शेष रब भरोसे कि न जाने आगे क्या हो।
लड़की वालों के घर में उसकी दो बहनें हैं, जो अपना घर छोड़कर घर में ही बैठी हुई हैं; क्योंकि उन्होंने भी अपने अपने पतियों की ज़िंदगी बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
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