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'I Married You Because You're an Only Daughter': The 13-Year Plight of a Daughter-in-Law in a Toxic Family
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‘तुम इकलौती बेटी हो इसलिए तुमसे शादी की’, एक टॉक्सिक फ़ैमिली की बहू की 13 साल की व्यथा

मेरी शादी को 13 साल हुए हैं। जिस घर में मेरी शादी हुई, तब मैंने नोटिस किया कि सभी लोग बहुत टॉक्सिक हैं। डबल स्टैंडर्ड्स, डबल फ़ेस। सास का लैंग्वेज बहुत ख़राब है, सब के साथ ऐसी ही हैं। मेरे आने से 1 साल पहले ही घर के सबसे बड़े बेटा बहू सास ससुर के बैड बिहेवियर के कारण घर छोड़कर जा चुके थे।

दूसरे बेटे ने भागकर शादी की है, उनकी शुरू से ही घर में मनमानी चलती है। मेरे हस्बैंड तीसरे नंबर पर हैं। पति के बाद एक और देवर हैं। ननद भी हैं जिसकी शादी हो चुकी मुझसे पहले, फिर भी उसकी इस घर में सबसे ज़्यादा चलती थी। एक तरह से वो बॉस थी घर की।

इन लोगों के बिहेवियर के बारे में मोहल्ले के सभी लोगों को भी पता है। ये लोग दूसरों के सामने बहुत अच्छा बनते हैं। जब मैं शादी करके इस घर में आई तो हस्बैंड ने शुरू में ही मुझे बता दिया था कि उन्होंने अपनी मर्ज़ी से शादी नहीं की है, उन्हें कोई और पसंद था।

अगर उनका बस चलता तो उससे ही शादी करते, लेकिन उनके माँ बाप को मैं पसंद आई थी और वह भी इसलिए क्योंकि मैं अपने माँ बाप की इकलौती बेटी हूँ। उन्होंने इन लोगों ने पैसे के लिए मुझसे शादी की है और गाहे बगाहे मज़ाक़ में भी यह इस तरह की बातें मुझसे करते थे।

शुरू से ही मुझे पहले से अंदाज़ा हो गया था, उनके बिहेवियर से भी यह पता चल रहा था। सगाई वाले दिन भी अपने घर में बिना बताए कहीं चले गए थे, बाद में जब उनसे पूछा तो उन्होंने कहा कि मैं शहर गया था जो कि हमारे यहाँ से 2 घंटे दूर है और दिनभर वहीं थे। कहा कि कॉल करने का समय नहीं था। उस वक़्त भी मेरी माँ को इन पर डाउट हो गया था, लेकिन तब भी हमें शादी करनी पड़ी क्योंकि अब हम पीछे नहीं हट सकते थे। शादी के बाद यह कन्फ़र्म हो गया कि वाकई में हमारा डाउट सही था।

उसके बाद से अब तक उनका यह बिहेवियर चालू है क्योंकि वह मुझे घर में सही से ट्रीट नहीं करते थे, सबके सामने ही मेरा मज़ाक़ बनाते थे। हमेशा एनी टाइम कुछ न कुछ बोलकर उनका मुँह चलते रहता था। कुछ न कुछ टाइम कोई फ्रेंड, कोई हँसी और सबके सामने वह मेरा मज़ाक़ बनाते थे।

शुरू में कई बार मैंने विरोध भी किया, लेकिन घर वालों को और अच्छा ही लगता था। वह लोग भी कहते थे कि मज़ाक़ कर रहा है, रहने दो। मेरे घर में सबको याद है सास, ससुर, ननद और जो दो नंबर जेठ जेठानी थे, सब लोग मेरा मज़ाक़ बनाते थे। बातों बातों में सबको आदत थी, उनका एक ही टारगेट था कि मुझे नीचे दिखाकर रहेंगे क्योंकि वह बिहेवियर के ख़राब हैं हमेशा से। यह बात वह नहीं चाहते थे कि घर में दबी रहे।

इसके बावजूद भी जब से मैं शादी करके आई हूँ, उसके बाद से ससुराल का परिवेश बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहा है। मेरी शादी करने के चार दिन बाद ही वह झगड़ा करके घर से निकल गए थे। मेरे जेठ और जेठानी एक महीने बाद वापस आ गए, सास ससुर उन्हें बुलाकर लेकर आए।

वह पहले भी मेरी बड़ी जेठानी से लड़ाई करते थे, इसलिए वह भी घर छोड़कर चली गई थी। हमेशा वो लोग देर से सोकर उठते थे, उसके बावजूद भी घर में तरह तरह की मनमानी करते थे और सारा काम सास से ही करवाते थे और बाहर जाकर कहती थीं कि मैं कोई काम ही नहीं करती।

मैं शादी के 2 महीने बाद ही प्रेग्नेंट हो गई थी और इस हालत में मुझसे बहुत काम करवाया था। हमेशा घर में लड़ाई झगड़ा मेरी जेठानी और सास में होते रहता था। वह मुझे लेकर और मेरे हस्बैंड को लेकर हमेशा कहती थी कि उसे कोई इम्पोर्टेंस नहीं देता, सब लोग मुझे इम्पोर्टेंस देते थे। जबकि होता इसका उल्टा था, हर तरह की सुख सुविधा और आराम वही करती थी घर में। यहाँ तक कि जेठ दोनों मिलकर घर में हमेशा बड़ी लड़ाई, किसी न किसी बात को लेकर लड़ाई लगाकर रखते थे।

यह तो पहले की बात है, लेकिन आज तक उन लोगों को मुझसे जलन है। हमेशा किसी न किसी बात पर, अब वह जलन मेरे बच्चों पर शिफ्ट हो गई है। अब बच्चों को लेकर, मेरे बेटे को लेकर, मेरी बेटी को लेकर हमेशा टारगेट करते हैं। मेरे हस्बैंड भी सुनकर कुछ नहीं बोलते। और भी बहुत ख़राब बिहेवियर किया है उन्होंने मेरे और मेरे बच्चों के साथ। सबसे ग़लत बात यह है कि मेरे हस्बैंड के सामने यह सब कुछ होता है और वह कुछ भी नहीं बोलते।

उनका मकसद साफ़ है। उनकी बहुत सी लड़कियों से, घर में और बाहर बहुत सी लड़कियों से फ्रेंडशिप है। वह फ्रेंडली बोलते भी हैं कि हाँ मेरी फ्रेंड है, बहुत सी लड़कियों से बोलते हैं सिर्फ़ फ्रेंडशिप है। शादी के 1 साल पहले उनकी प्राइवेट जॉब लगी थी ऐज़ ए टीचर, अभी भी वह एक बहुत ही अच्छे टीचर हैं, अपने प्रोफ़ेशन में वह बहुत अच्छे हैं। जबकि शादी के वक़्त मैं ही ग्रेजुएट थी घर में और मेरी जेठानी भी अभी पढ़ाई ही कर रही थी क्योंकि वह भागकर शादी की थी इसलिए उसकी पढ़ाई अभी इनकम्प्लीट थी। मेरे हस्बैंड भी ग्रेजुएट नहीं थे, उन्होंने बाद में ग्रेजुएशन किया है।

मेरी शादी के बाद मुझे करियर बनाने का कोई मौक़ा ही नहीं मिला। यह लोग कहते तो थे लेकिन यह मुझे सपोर्टिव नहीं लगते थे। मैं घर में ट्यूशन पढ़ाती थी तो वह पैसे भी मुझसे ले लेते थे। ऊपर से 1 साल के भीतर ही मेरा बच्चा हो गया था।

क्योंकि मेरी सास बिल्कुल भी सपोर्टिव नहीं थीं, बच्चों को पकड़ती ही नहीं थीं थोड़ा भी, सब मेरे ऊपर ही था। न ही मेरे हस्बैंड सपोर्टिव थे तो मैं कैसे नौकरी के लिए जाऊँ? ऐसे बीच में तीन चार साल बाद फिर मेरी बेटी हो गई।

शुरू शुरू में मेरे हस्बैंड किसी के सामने मुझे बोलते तक नहीं थे, एक्सेप्ट ही नहीं करते थे कि मेरी वाइफ़ भी है। वह दुनिया से छिपाते थे कि मैं शादीशुदा हूँ, मेरी वाइफ़ भी है। जहाँ भी वाइफ़ की ज़रूरत पड़े, आज भी वह मुझे नहीं लेकर जाते हैं। आज तक उनके फ़ेसबुक या सोशल मीडिया पर बहुतों के साथ, ज्यादातर पैरेंट्स गार्डियंस और औरतों के साथ ही फोटो हैं। घर में पिक्चर्स हैं लेकिन घर में मेरी और उनकी कोई फैमिली पिक्चर नहीं है। कभी भी उनको पिक्चर्स क्लिक करने का, सोशल मीडिया पर फ़्रेंड्स का बहुत शौक़ है, लेकिन एक भी पिक्चर मेरे साथ नहीं है। कभी भी मेरे साथ पिक्चर नहीं खिंचवाते। यह बात सब उनके दोस्त और टीचर्स भी कहते हैं, लेकिन फिर भी वह हँसकर टाल देते हैं।

उनके दोस्तों और टीचर्स को भी पता है कि मेरे साथ कैसा बिहेवियर रखते हैं। वह लोग इनको बोलते भी हैं, लेकिन फिर भी इन पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता। मुझे लगता है कि इन लोगों को सिर्फ़ एक ही बात से फ़र्क पड़ेगा, कहीं न कहीं सबको इस बात का बिलीव है कि मैं कहीं नहीं जाऊँगी। हालाँकि इस बीच मैंने इस सब का बहुत विरोध किया है, ऐसा नहीं कि मैंने कुछ बोला नहीं है, लेकिन इन पर किसी बात का कोई फ़र्क ही नहीं पड़ता। यह लोग बस अपनी ही चलाते हैं।

और भी बहुत कुछ ग़लत हुआ है। वह खुद एक टीचर हैं लेकिन मेरे बच्चों की पढ़ाई और स्टडीज़ पर ध्यान नहीं देते कभी भी। न उन्हें कहीं घुमाने लेकर जाते हैं, बस अपने घूमने और खाने का शौक़ है उनको। घर पर आते हैं तो बस मोबाइल और कुछ नहीं। मैं और मेरे बच्चे बस लेफ़्ट आउट फ़ील करते हैं।

अब मेरा बच्चा 12 साल का है, वह बहुत कुछ समझने लगा है और बिगड़ने भी लगा है उनकी यह सब आदतें देखकर। उनसे हमेशा तनाव रहता है। बेटी 7 साल की है। अब मैं इस परिवेश में बच्चों को बड़ा नहीं करना चाहती। मुझे क्या करना चाहिए? प्लीज सजेशन दीजिए। मैं पहली बार इस तरह से किसी प्लेटफॉर्म पर अपनी बात रख रही हूँ, प्लीज मुझे उचित सजेशन दीजिए।

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About the Author

Rajeev Kumar Singh is a mental health advocate and founder of Jazbaat Help Center — a platform dedicated to emotional well-being, mental health awareness, and psychological support in Hindi. With years of experience helping individuals navigate complex emotions, relationships, and life challenges, Rajeev specializes in narcissism, toxic relationships, emotional healing, and culturally rooted mental wellness for Hindi-speaking communities. Read more about Rajeev →

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