20 साल का सफर और शक की बुनियाद
मेरी शादी को 20 साल हो चुके हैं। जिस दिन वे देखने आए, उसी दिन सगाई हो गई थी। साल 2006 में शादी हुई। मेरे पति शुरू से ही पता नहीं क्यों मुझे शक की नज़र से देखते थे। वे बहुत सुंदर थे, जबकि मैं उनसे कम सुंदर हूँ। अब बच्चे बड़े हो गए हैं; एक बेटा 19 साल का है और दूसरा 16 साल का है। मैं शुरू से ही मेरे चरित्र को लेकर उनकी उल्टी-सीधी बातें सुनती आई हूँ।
अपनों के गुनाह और मेरी सजा
वे शक्की शायद इसलिए हैं क्योंकि उनकी सगी भाभी ऐसी ही थीं और सरेआम 3-4 बार पकड़ी गई थीं। उनकी चचेरी बहन भी वैसी ही थी, लेकिन इसमें मेरा क्या कसूर है? मैंने तो कुछ नहीं किया ना! वे सारी भड़ास मुझ पर क्यों निकालते हैं? अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होता। घर में बच्चों के साथ कोई बात हो, तो उन्हें बोलते हैं कि “यह मेरा नहीं है, किसी का गंदा खून है, पता नहीं किसका खून है।” वे ऐसी बातें बोलते हैं जो मुझे अंदर तक तोड़ देती हैं।
शुरुआती दिनों की कड़वी यादें
जब शादी के बाद पहली बार मुझे पीरियड्स हुए, तब भी इस आदमी ने मेरा पैड तक निकलवा कर चेक किया था कि कहीं मैं झूठ तो नहीं बोल रही। पर तब मुझे कुछ समझ नहीं आता था कि यह सब शक होने की वजह से करते हैं। कल यह बात भी मैंने उन्हें याद दिलवा दी कि तुम शुरू से ही ऐसे थे।
DNA टेस्ट: एक आखिरी उम्मीद और मजबूरी
कल भी घर में क्लेश हुआ और उन्होंने फिर वही सब बोला, तो मुझे भी गुस्सा आया और मैंने भी सुना दिया कि दोनों का डी.एन.ए. टेस्ट करवाकर रिपोर्ट तुम्हारे मुँह पर मारूँगी। बस इसीलिए मैं टेस्ट करवाना चाहती हूँ, लेकिन जब गूगल पर रेट देखा तो पता चला कि इसकी शुरुआत ₹13,000 से होती है। यह तो मेरे बजट से बाहर है। अगर दो, चार या पाँच हजार की बात होती, तो मैं कहीं से जुगाड़ कर लेती, लेकिन इतने पैसे मेरे पास नहीं हैं।
क्या करूँ, मर जाऊँ क्या?
वे मुझे इतनी गंदी बातें बोलते हैं कि मैं अपना पूरा दुख लिख भी नहीं सकती। अब मैं क्या करूँ, मर जाऊँ क्या? जवान बच्चे हैं, अगर वे किसी नशे में लग गए तो मेरी आत्मा रोएगी।
कहानी के मुख्य बिंदु :
- 20 साल का संघर्ष: मेरी शादी को 20 साल हो चुके हैं (2006 में शादी हुई थी), लेकिन शुरुआत से ही पति मुझ पर शक करते आए हैं।
- सुंदरता और असुरक्षा: मेरे पति दिखने में बहुत सुंदर हैं और मैं उनसे कम सुंदर हूँ, शायद इसी वजह से वे मुझे हमेशा शक की नज़र से देखते हैं।
- परिवार का इतिहास: पति के शक्की होने का एक कारण उनके परिवार की अन्य महिलाओं (भाभी और चचेरी बहन) का आचरण रहा है, जिसकी सज़ा वे मुझे देते हैं।
- बच्चों पर लांछन: हमारे दो बेटे हैं (19 और 16 साल), लेकिन पति उन्हें अपना मानने से इनकार करते हैं और उन्हें “गंदा खून” कहकर बुलाते हैं।
- असहनीय मानसिक प्रताड़ना: शादी के शुरुआती दिनों में पीरियड्स के दौरान पैड चेक करने जैसी अपमानजनक हरकतें भी उन्होंने की थीं, जो उनकी गहरी मानसिक बीमारी को दर्शाता है।
- DNA टेस्ट का संकल्प: हालिया झगड़े के बाद मैंने तय किया कि मैं DNA टेस्ट करवाकर रिपोर्ट उनके मुँह पर मारूँगी ताकि उनकी बोलती बंद हो सके।
- आर्थिक मजबूरी: गूगल पर चेक करने पर पता चला कि टेस्ट की कीमत ₹13,000 से शुरू होती है, जो मेरे बजट से बाहर है। अगर यह 2-5 हजार का काम होता तो मैं जुगाड़ कर लेती।
- मानसिक हताशा: पति की गंदी बातों और इस हालात से तंग आकर कभी-कभी मन में मरने के विचार आते हैं, लेकिन जवान बच्चों के भविष्य की चिंता मुझे रोके हुए है।





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