संवेदनशील मन: अशांत घर में शांति खोजने का सूत्र

यह पेज उन लोगों के लिए खास तौर पर बना है जो बहुत ही संवेदनशील मन लेकर संसार में पैदा हुए और जो चारों तरफ घर-बाहर में निष्ठुरों से घिर गए। ऐसे संवेदनशील इंसानों को बचाना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि उनके आस-पास के लोग यह नहीं समझ पाते कि मन पर भावनाओं का आघात कितनी चोट पहुँचाता है। भावनात्मक रूप से कठोर या मोटी खाल के हो चुके लोगों को यह समझ ही नहीं आता कि उनके बीच रह रहा कोई सेंसिटिव इंसान कितनी परेशानी झेल रहा है। ऐसे परेशान लोग अगर रोज़-रोज़ इस पेज को पढ़ेंगे, तो उनके लिए मैं कुछ न कुछ लेकर आता रहूँगा ताकि उन्हें मानसिक शांति और स्थिरता मिले।


बाहर निकलना: पहला कदम

अगर आप किसी घर में हैं और वहाँ के कलह भरे माहौल में मानसिक रूप से अशांत हो चुके हैं, तो इसका सबसे अच्छा तरीका तो यह है कि किसी भी बहाने से, चाहे पढ़ाई हो या कोई और कारण हो, घर के घुटन भरे माहौल से बाहर निकलें। यह याद रखें कि घर में घुटन हवा की तरह अदृश्य चीज़ है जो सिर्फ आपके लिए मौजूद है। बाकी लोगों के लिए तो वही माहौल टाइमपास है। अगर उन्हें चिल्लाहट और होहल्ला न मिले, तो वे जी नहीं पाएँगे। आप वैसे माहौल में नहीं जी पा रहे हैं, तो यह समस्या आपकी है और इसका समाधान आपको ही तलाशना है। अगर आप घर से बाहर निकलने में कामयाब हो पाएँगे, तो आपकी परेशानी का बहुत हद तक समाधान हो जाएगा।


जब बाहर निकलना संभव न हो

अब दूसरी परिस्थिति पर विचार करते हैं कि आपको उसी घर में रहना है और बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं, कोई उपाय नहीं है, तब आप क्या करेंगे? आपको अपने पिता से परेशानी हो या भाई ही परेशान कर रहा हो या घर में रह रहा कोई भी सदस्य या कई सदस्यों के व्यवहार से आप दुखी हों, तब आप क्या उपाय करेंगे? बहुओं या घर की महिला सदस्यों के लिए भी अक्सर सारे रास्ते बंद होते हैं, उन्हें अगर घर में घुटन है तो वे क्या कर सकती हैं?

इसी सवाल का जवाब मैंने अपनी ज़िंदगी में तलाशने की कोशिश की और आज मैं उसी माहौल में रहकर बेहतर जीवन जी रहा हूँ। मैं घर के उसी खराब माहौल में अब शांति से रह लेता हूँ, जबकि एक समय में लगता था कि दुनिया ही छोड़ दूँ।


मेरा सूत्र है:

नो रिएक्शन, लेस कम्युनिकेशन, नॉमिनल रिलेशन


इस उपाय को मैंने नाम दिया है: भावनात्मक प्रतिक्रिया पर नियंत्रण, संवाद को कम से कम रखें, रिश्ते को नाम मात्र का ही निभाएँ। मेरे इस सूत्र का लाभ पेज के कुछ सदस्यों ने उठाया है और उन्होंने मुझे मैसेज किया कि वे इसे आज़मा रहे हैं।

1. नो रिएक्शन (No Reaction)

हमारे अंदर तनाव और घुटन हमारी भावनात्मक प्रतिक्रिया की वजह से होता है। अगर हम घर के माहौल में रहकर नो रिएक्शन की प्रैक्टिस करें, तो धीरे-धीरे हमारी भावनात्मक प्रतिक्रिया पर नियंत्रण हो सकता है। कोई कुछ कहे, कहीं से कोई आवाज़ आए, कोई प्रतिक्रिया नहीं देनी है, न मन में, न बाहर। मन के अंदर प्रतिक्रिया होगी तो वह बाहर निकलने का प्रयास करेगी, फिर घुटन पैदा होगी। इसलिए अंदर-बाहर सारी प्रतिक्रियाओं पर लगाम लगाना है। ऐसा तभी संभव है जब आप अपनी भावनाओं को देखना या ‘ऑब्जर्व’ करना सीखिए। प्रयास कीजिए, आप अपने विचारों को देख पाएँगे।

2. लेस कम्युनिकेशन (Less Communication)

लेस कम्युनिकेशन के तहत आप ऐसे रिश्तों से कम से कम संवाद करें जो आपको घुटन देते हैं। कोई बात करना चाहे तो “हूँ, हाँ” में जवाब देकर टालें। बात से ही बात आगे बढ़ती जाती है, इसलिए बात को होने से ही रोकें। ऐसे लोगों से बात करें जहाँ आप खुलकर अपनी बात कह सकें, ऐसे दोस्तों और रिश्तेदारों का एक सर्किल बनाएँ। आपके जीवन में एक-दो ही ऐसे अच्छे रिश्ते मिल जाएँ तो समझिए आपके मन को बहुत सुकून मिलेगा। भीड़ से रिश्ता रखने के बजाय उन्हीं एक-दो-तीन लोगों से गहरा रिश्ता बनाएँ और खुलकर सारी बातें करें। बाकी लोगों के साथ लेस कम्युनिकेशन के मोड में जीएँ। एक घर में रहकर यह संभव है। आप सिर्फ ज़रूरी बातें करें। कम से कम संवाद होगा तो कम से कम आपको मानसिक परेशानी होगी। संभव हो तो ऐसे कमरे में रहें जहाँ तक घर के खराब माहौल की आवाज़ आप तक न पहुँचे।

3. नॉमिनल रिलेशन (Nominal Relation)

नॉमिनल रिलेशन का मतलब है नाम का रिश्ता। हाँ है, चलो कहने को रिश्ता है। अब जब रिश्ते में भावना या गर्मी ही नहीं रही, बस झगड़े ही झगड़े हैं, तो ऐसे रिश्ते से न रिश्ता होना ज़्यादा बेहतर है। लेकिन फिर भी समाज में रिश्तों को तोड़ना इतना आसान भी नहीं, तो उन कलह भरे रिश्तों से आप मानसिक अलगाव कर लें तो इससे आपकी मानसिक परेशानी कम हो सकती है। जैसे कि, पति-पत्नी के बीच तलाक लेना संभव न हो तो परेशान पति या पत्नी को घर में ही अलग-अलग जीने का प्रयास करना चाहिए। जो परेशान है, वो उसी घर में रहकर अलगाव की स्थिति में जी सकता है। यह अवस्था कम से कम कलह वाली अवस्था से तो बेहतर ही होगी।


सूत्र को कब और कैसे आज़माएँ

नो रिएक्शन, लेस कम्युनिकेशन, नॉमिनल रिलेशन का सूत्र वहीं कारगर हो सकता है जहाँ मारपीट न हो, सिर्फ मौखिक कलह हो। जहाँ मारपीट हो, वहाँ यह बिल्कुल भी कारगर नहीं। वहाँ तो आपको भी अर्जुन की तरह कुरुक्षेत्र में उतरना पड़ेगा, इसके अलावा कोई उपाय नहीं।

लेकिन सिर्फ मौखिक कलह हो तो वहाँ आप इस सूत्र का अभ्यास कर सकते हैं:

  • थोड़ा कलह हो: सिर्फ़ नो रिएक्शन प्रैक्टिस कीजिए।
  • ज़्यादा कलह हो: नो रिएक्शन और लेस कम्युनिकेशन प्रैक्टिस कीजिए।
  • बहुत ही ज़्यादा कलह हो: तीनों सूत्र (NRLCNR) प्रैक्टिस कीजिए।

यह उन युवाओं के लिए फायदेमंद है जो घर के खराब माहौल में पढ़ाई पर फोकस नहीं कर पाते। यह उन पुरुषों और महिलाओं के लिए कारगर है जो शादी जैसे रिश्ते में बँधकर फड़फड़ाते रहते हैं। एक बार आज़मा कर देखिए। यह सूत्र आपको न केवल मानसिक शांति देगा, बल्कि यह भी सिखाएगा कि अपनी भावनाओं की ऊर्जा को कैसे बचाएँ और उसे रचनात्मक कार्यों में लगाएँ।

वैसे आप कोई अपना ही तरीका खोजें तो वो भी अच्छा है। कई लोग इन सब से बचने के लिए कान में ईयरफ़ोन लगाए रहते हैं या दिमाग को मोबाइल में खपाने में लगे रहते हैं, उनके आँख-कान ख़राब हो सकते हैं, तो क्यों न कोई ऐसा उपाय खोजिए जो बिना इंद्रियों को ख़राब किए आपको मानसिक रूप से कुछ शांति दे।

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